मेरे सनकी अरबपति बनने से पहले

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अध्याय 79

समर की नज़र से

“क्या मैं…” कियेरन ठिठका। उसकी नज़र मेरी उँगलियों पर गई, फिर मेरे चेहरे पर लौट आई। उसकी आवाज़ बेहद संभली हुई थी, लगभग शिष्ट। “क्या मैं इसे चाटकर साफ कर दूँ?”

उस सवाल ने मुझे जैसे सचमुच छूकर झकझोर दिया। मेरा दिमाग़ एक पल को ठप्प पड़ गया। “क्या?”

“तेल।” चाँदनी में उसकी आँखें गहरी...

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